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Dard Shayari
कुछ इसलिये भी ख्वाइशो को मार
कुछ इसलिये भी ख्वाइशो को मार
कुछ इसलिये भी ख्वाइशो को मार देता हूँ
माँ कहती है घर की जिम्मेदारी है तुझ पर
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परेशानी में कोई सलाह मांगे तो
मेरे आँसुओ की गवाही ना लेनातेरे
सुहाना मौसम ओर हवा मे नमी
इश्क न होने के सिर्फ दो
Arre beshak dil todne ki aadat
कुछ कर गुजरने की चाह में
बुजदील हम नही जो पीछे से
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मुस्कुराने से भी होता है ग़मेंदिल
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