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Two Lines
Dil Shayari
वो ढल रहा है तो ये
वो ढल रहा है तो ये
वो ढल रहा है तो ये भी रंगत बदल रही है
ज़मीन सूरज की उँगलियों से फिसल रही है
er kasz
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बैठी हूं बाग में मिलना न
मोहब्बत उस से नहीं की जाती
शायरी से ज्यादा प्यार मुझे कहीं
मैं और उसको भूल जाऊँ कैसी
जिन्दगी की उलझनों ने कम कर
वक्त तू कितना भी सता ले
कमबख्त दिल तैयार ही नही होता
रात भर चलती रहती है उँगलियाँ
Yun Tasalli De Rahe Hain Hum
बहुत अच्छा लगेगा ज़िन्दगी का ये
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