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Dard Shayari
नज़रनज़र का फर्क है हुस्न का
नज़रनज़र का फर्क है हुस्न का
नज़र-नज़र का फर्क है हुस्न का नहीं
महबूब जिसका भी हो बेमिसाल होता है
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