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Kashish Shayari
आग लगाना मेरी फितरत में नही
आग लगाना मेरी फितरत में नही
आग लगाना मेरी फितरत में नही है
मेरी सादगी से लोग जलें तो मेरा क्या कसूर
Er kasz
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याद आयेगी मेरी तो बीते कल
आजकल दिल कुछ ठीक सा नही
Mere dard ki tu intha na
अमीर होता तो बाज़ार से खरीद
अगर किसी दिन तुम्हे रोना आये
सुनो बहुत इंतजार करता हूँ तुम्हारासिर्फ
मेरी लिखी किताब मेरे ही हाथो
मयखाने से पूछा आज इतना सन्नाटा
अगर मेरी शायरियों से बुरा लगे
कोई मासूम लड़की प्यार में कुर्बान
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