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Two Lines
Sad Shayari
काश मै लौट पाऊँ बचपन कि
काश मै लौट पाऊँ बचपन कि
काश मै लौट पाऊँ बचपन कि उन गलियों में
जन्हा ना कोई ज़रूरी था ना कोई जरूरत
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दर्द को इकट्ठा किया है मैंनेमुस्करा
रिश्ता दिल से होना चाहिए शब्दों
दिल से बेहतर तो रावण हैसाल
मैंने दिल के दरवाजे पर लिखा
कैसे गुजरती है हर शाम मेरी
कभी हंसकर कभी रोकर न जाने
चल ऐ दिल किसी अनजान सी
तलाश कर लो मेरी कमियों को
किसी रोज रोशन मेरी भी जिंदगी
पूछा था हाल उन्होंने बडी मुद्दतों
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