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Sad Shayari
दफ़न हे मुझमे मेरी कितनी रौनके
दफ़न हे मुझमे मेरी कितनी रौनके
दफ़न हे मुझमे मेरी कितनी रौनके मत पूछो
उजड़ उजड़ कर जो बसता रहा वो शहर हु मे
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कुछ पल खामोशियों में खुद से
आज तो मौत सी थकावट है
कुछ लोग मेरी शायरी से सीते
मैंने जान बचा के रखी है
कुछ तो रहम कर ऐ संग
Maine To Aapki Har Adao ko
उम्र गुज़र गई उससे बिछड़े अब
छेड़कर जमानेभर की लड़कियों को रोया
मयखाने से पूछा आज इतना सन्नाटा
वक्त तू कितना भी सता ले
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