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Taarif Shayari
शुबह हुई कि छेडने लगा है
शुबह हुई कि छेडने लगा है
शुबह हुई कि छेडने लगा है सूरज मुझको
कहता है बडा नाज़ था अपने चाँद पर अब बोलो
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