Home
Aapka Swagat Hai
Shayari Bazar
Mai
Toggle navigation
Menu
English
Punjabi
Hindi
Urdu
Haryanvi
Two-lines
Riddles
Sms
Facebook Status
Jokes
Quotes
Catholic
Home
Hindi
Bewafa Shayari
गिलेसिकवे में उलझ कर रह गयी
गिलेसिकवे में उलझ कर रह गयी
गिले-सिकवे में उलझ कर रह गयी मौहब्बत अपनी
समझ में नही आता मौहब्बत चल रही थी या कोई मुकदमा
Like
(
0
)
Dislike
(
0
)
Share
Related Post
मई का महीना भी बड़ा विचित्र
कुछ इसलिये भी ख्वाइशो को मार
वो हमको पत्थर और खुद को
तरस गए आपके दिदार कोफिर भी
प्रेमी: डार्लिंग आज बरसात का दिन
Main Tujh Ko Chand Kahon Ye
मौसम को मौसम की बहारों ने
किसी ने पूछा कौन याद आता
हमेशा के लिए रखलो ना मुझे
प्रेमिका: मुझसे वादा करो कि मुझे
Your Comment
Login
Your Comment