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Inspirational Shayari
नज़रनज़र का फर्क है हुस्न का
नज़रनज़र का फर्क है हुस्न का
नज़र-नज़र का फर्क है, हुस्न का नहीं ;
महबूब जिसका भी हो बेमिसाल होता है !!
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मनाने का रिवाज़ उसकी किताब में
एक दूसरे से बिछड़ के हम
आँसू बहा बहा के भी होते
अगर प्यार करते हो तो सामने
सिखा न सकी जो उम्र भर
नमक की तरह हो गयी है
न चाहते हुए भी उसे छोड़कर
किसी शायर से कभी उसकी उदासी
हमेँ सिँगल रहने का शौक नहीँ
हमने गुज़रे हुए लम्हों का हवाला
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