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Taarif Shayari
न कोई इल्ज़ाम न कोई तंज़
न कोई इल्ज़ाम न कोई तंज़
न कोई इल्ज़ाम न कोई तंज़ न कोई रुस्वाई मीर; दिन बहुत हो गए यारों ने कोई इनायत नहीं की।
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कोई रास्ता नहीं दुआ के सिवा;
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जिनकी हसरत थी उनका प्यार ना
हर ख़ुशी गम का ऐलान है;
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मोहब्बत मुक़द्दर है एक ख्वाब नहीं;
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टूटे हुए सपनो और छुटे हुए
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