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Love Shayari
न लफ़्ज़ों का लहू निकलता है
न लफ़्ज़ों का लहू निकलता है
न लफ़्ज़ों का लहू निकलता है न किताबें बोल पाती हैं
मेरे दर्द के थे दो गवाह दोनों बे-जुबान निकले
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अब कहा जरुरत है हाथों मे
ये जलजले यूँ ही बेसबब नहीं
जिनकी शायरियों में ददँ हौता हे
कितना दर्द है दिल में दिखाया
दर्द से हाथ न मिलाते तो
जब्र है कह्र है क़यामत है;
वक्त के तराजू में अब किसे
सारा दिन लगता हे खुद को
हमनें जब किया दर्दएदिल बयां तो
तेरी बेवफाई ने मेरा ये हाल
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