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Love Shayari
मालूम नहीं क्यूँ मगर कभीकभीअल्फाजों से
मालूम नहीं क्यूँ मगर कभीकभीअल्फाजों से
मालूम नहीं क्यूँ मगर कभी-कभी
अल्फाजों से ज्यादा मुझे तेरा नाम लिखना अच्छा लगता है
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मुझे दर्दएइश्क़ का मज़ा मालूम है;
सब कुछ बदला बदला था जब
हम तुझ से किस हवस की
संस्कार की बात मत कर पगली
मेरे प्यार को वो समझ नहीं
आज आपके प्यार में कमी देखी;
एक लम्हें में ही दम तोड़
रफ़्तार कुछ इस कदर तेज़ है
खो जाओ मुझ में तो मालूम
अगर तुम समझ पाते मेरी चाहत
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