Main kyun na tark e ta aluk ki abtada karta
Woh door ka baasi tha kia wafa karta
G.R..s

Meri Ibadaton Ko Aise Kar Qubool Ae Mere Maalik; Ke Sajde Mein Main Jhukoon To Mujhse Judde Har Rishto Ki Zindagi Sanwr Jaye!

खुदा को भी है आरज़ू तेरी; हमारी तो भला औकात क्या है।

ना जी भर के देखा ना कुछ बात की; बड़ी आरज़ू थी हम को मुलाक़ात की।

लिपट जाते हैं वो बिजली के डर से; इलाही ये घटा दो दिन तो बरसे।

अगर इंसान मिल जाए मुकम्मल; तो सर पत्थर के आगे क्यूँ झुकाऊँ।

खुद ही दे जाओगे तो बेहतर है
वरना हम दिल चुरा भी लेते हैं
G.R..s

सलामती खुदा से माँगते हैं उनकी; जिन्होंने खुद उजाड़ा था मुझको।

शायद कोई तराश कर किस्मत संवार दे; यह सोच कर हम उम्र भर पत्थर बने रहे!

अभी लिखी है गज़ल तो अभी दीजिये दाद़
वो कैसी तारीफ जो मिले मौत के बाद

ये आरज़ू भी बड़ी चीज़ है मगर हमदम; विसाल-ए-यार फ़क़त आरज़ू की बात नहीं।

तेरा पहलू तेरे दिल की तरह आबाद रहे; तुझ पे गुज़रे न क़यामत शब-ए-तन्हाई की।

ख़्वाहिश नहीं मुझे मशहूर होने की; आप मुझे पहचानते हो बस इतना ही काफी है।

मिसाल-ए-शीशा हैं हम हमें संभाल कर रखना; तेरे हाथ से छूटे तो बिखर जाएंगे।

यही बहुत है कि तूने पलट के देख लिया; ये लुत्फ़ भी मेरे अरमां से ज्यादा है।