यह मोहब्बत भी है क्या रोग फ़राज़; जिसे भूले वो सदा याद आया।

चलो बाँट लेते हैं अपनी सजायें; न तुम याद आओ न हम याद आयें।

यादे अजीब होती हैं; बता के नहीं आती और रुला कर भी नहीं जाती!

तू अभी और भी तनहा होगी:
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मैं अभी और भी याद आने वाला हूँ.
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महरूम ना कर साये से अपने ....
बिखर जायेंगे फिर आँखों से सपने !!

तुम्हारे बाद मैं जिस का हो गया
पगली उसी का नाम तन्हाई हैं

ऐ अन्ज़ान उससे कह दो कि, मोहब्बत नही आती, पर रहम तो आता होगा ना?

सबूत गूनाहो के होते हैं,
बेगुनाह मुहब्बत का क्या सबूत दू ?

तड़पती देखता हूँ जब कोई चीज
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उठा लेता हूँ अपना दिल समझ कर

बहुत दूर तक जाना पड़ता है,
सिर्फ यह जानने के लिए, नज़दीक कौन है..

तु होगी चाँद का टुकडा ,
पर मे भी मेरे पापा का जीगर का टुकडा हु..

यु ही उम्मीद दिलाते है ज़माने वाले
कब लौटकर आते है जाने वाले

तुम महरी के होड़ करोगे
हम ते एक डले में सारी जामन जाड़ दिया करा

दिल टूटा है तो अपनी ही गलती से
उसने कब कहा था कि तू मोहब्बत कर

आज दिल में बेचैनी कुछ जादा हो रही है
तुम जहाँ भी हो ठीक तो हो न